मारी पत्र
(THE MARI LETTERS)
आधुनिक मारी नगर, आधुनिक तेल एल-हरीरी की खोज सर्वप्रथम सन् 1932 में विलियम फोक्सवेल्ट ने की थी। तदुपरांत सन् 1933 में आन्द्रे पेरे ने उत्खनन प्रारंभ किया। मारी की खुदाई में सबसे महत्वपूर्ण इश्तर देवी का मंदिर प्राप्त होना है। बेबीलोन में इश्तर, प्रजनन की देवी के रूप में विख्यात थी। ये जिगुरात एवं मीनार युक्त मंदिर उर एवं मेसोपोटामिया के अन्य स्थलों के सदृश्य ही थे। इस देवी की ख्याति का इस बात से अनुमान किया जा सकता है कि राज्य के आधिकारिक शासनकार्यों में इश्तर देवी का ही प्रतीकात्मक चिन्ह के रूप में उपयोग किया जाता था।
एक अन्य महत्वपूर्ण खोज में शाही महल की खोज उल्लेखनीय है। यह अव्यवस्थित इमारत बेबीलोन के प्रथम राजवंश का माना जाता है। यह नगर के मध्य में स्थित है और इसमें लगभग 300 कमरे हैं। शाही कमरा अच्छी तरह संरक्षित, कुछ अमूल्य चित्रों से चित्रित है। इस शाही कमरे, धर्मशास्त्र के विद्यालय एवं प्रशासनिक कमरों के कारण यह मध्यपूर्व का एक बेहतरीन राजमहल था। इस महल को बाद के समयों में अमोरी लोगों ने बनाया जहाँ वे अदद एवं दागोन आदि देवताओं की पूजा करते थे।
उत्खनन के दौरान 20,000 मृदा पत्रों का मिलना अत्यन्त रोचक रहा। यह बाइबिल ज्ञान को बढ़ाने में एक क्रांतिकारी खोज साबित हुई। इन मृदा पत्रों में पुराने बेबीलोन की भाषा का प्रयोग किया गया था, जिनका काल ई.पू. 1700 निर्धारित हुआ है। सूसा नामक स्थान में प्राप्त (सन् 1901) मृदा पत्रों से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है कि राजमहल का निर्माण राजा यशायाह-अद्दद द्वारा प्रारंभ कर राजा जिन्नी-लिम के शासन काल में पूर्ण हुआ। अन्य खोजों से यह ज्ञात होता है कि राजा यशायाह-अद्दद, के पिता शमशी-अद्दद प्रथम, जो कि असीरिया के शक्तिशाली सम्राट एवं भवन निर्माता थे, का भी यह अधिकार क्षेत्र था। ऐसे भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं, जिससे साबित होता है कि राजा जिन्नी-लिम का बेबीलोन के राजा हम्मुराबी एवं अलप्पो राज्य के राजा से राजनयिक संबंध थे। अलप्पो के राजा की ओर से जिन्नी-लिम को लिखे दो पत्र भी प्राप्त हुए हैं, जिसमें अलप्पो राज्य के देवता अदद की ओर से भविष्य सूचक कथन कहे गए हैं। इस कथन का विषय एवं अभिप्राय बाइबिल की एक भविष्यवाणी से काफी मिलती-जुलती है।
बाइबिल महत्व
प्राप्त पत्रों का महत्व बाइबिल विद्यार्थियों के लिए इसलिए बढ़ जाता है, चूँकि यह हमारे इब्रू कुल पिताओं का कनान जाने के पूर्व निवास स्थान रहा है। मारी मृदा पत्रों में अब्राहम के दादा नाहोर द्वारा एक दास महिला के लिए एक पत्र भी मौजूद है, जिसे उन्होंने उस दास महिला के द्वारा राजा को भिजवाया था। जिसमें लिखा था कि “इनिब-शीरन जो कि एक दासी है, है मेरे स्वामी मैं कुछ वक्त तक नाहोर के साथ रहूँगी। शान्ति स्थापित हो चुकी है और रास्ता भी साफ है। अतः मेरे स्वामी मुझे लिखें कि आप मुझे कब यहाँ से ले जायेंगे? ताकि मैं स्वामी का चेहरा देख सकूँ जिसने मुझे यहाँ से मुक्त किया। मेरे स्वामी मृदा पत्र में मुझे जवाब भेजें। इस पत्र से नाहोर के निवास स्थान की पुष्टि होती है (उत्प. 24:10)।
उक्त खोज से यह ज्ञात होता है कि बाइबिल में स्थित वंशावली के आधार पर अब्राहम का ऊपर से देशान्तरण राजा जिन्नी-लिम के शासन काल एवं मारी के पतन से लगभग 400 वर्ष पूर्व हुआ था। मारी राज्य के पतन के समय मारी, उर के राज्यपालों द्वारा शासित था एवं मारी के राजकुमार इश्वी-इरा (ई.पू. 2021) जिसने इस नगर को स्थापित किया, उर नगर के क्रमिक पतन हेतु जिम्मेदार था।
मारी इसलिए भी महत्वपूर्ण खोज माना जाता है कि इन पत्रों में ‘इब्रू’ शब्द की पुनरावृत्ति अनेकों बार हुई है। अब्राहम ‘इब्रू’ नाम से भी बाइबिल में पुकारे गये (उत्प. 14:13), जिसका अर्थ है ‘घुमक्कड़’ अर्थात् जो एक स्थान से दूसरे स्थान चलते रहते हैं। यह उपाधि अब्राहम के लिए पूर्णतः उचित भी थी। अब्राहम द्वारा उर से कनान देशान्तरण करने पर वे निश्चित तौर पर मारी से होते हुए गए। शायद तेरह, अब्राहम और उनके परिवार ने मारी के किसी सराय में कुछ दिन अर्थात् हफ्ते रुककर समय बिताया हो और उन्होंने भी इस राजमहल को देखा हो।
मारी नगर मूर्तिपूजकों एवं उनके अनुष्ठानों से भरा हुआ था। पुजारियों का लोगों के दैनिक जीवन में अच्छा-खासा प्रभाव एवं महत्व था। लोग पुजारियों के पास अपनी समस्या लेकर जाया करते थे। हमारे कुल पिता इन मूर्तिपूजकों की विधियों को मानने एवं परमेश्वर की आराधना करने हेतु स्वतंत्र थे।
इसका उदाहरण हम राहेल द्वारा अपने पिता के घर से चुराए गृह देवताओं में पाते हैं, जिसे याकूब ने अपने से दूर करने की आज्ञा दी, जिसे शकेम में सिंदूर वृक्ष के नीचे गाड़ दिया गया था (उत्प. 35:2-4)।
ऐतिहासिक महत्व
ऐतिहासिक महत्व की दृष्टि से यह खोज सिद्ध करती है कि असीरिया के राजा शमशी-अद्दद प्रथम ई.पू. 1748-1716 तक शासनरत थे, जो कि बेबीलोन के महान शासक हम्मुराबी के समकालीन थे। इस आधार पर राजा हम्मुराबी का शासन काल ई.पू. 1728-1676 निश्चित किया गया। यह खोज बेबीलोन के राजा हम्मुराबी के अतिरिक्त राजा आम्राफेल की शिनाख्त करती है, जो कि बाइबिल के उत्पत्ति 14:1 में पाया जाता है।
राजा हम्मुराबी एक मजबूत सैन्य प्रमुख एवं अधिपति रहे। बेबीलोन का वैभव ई.पू. 1830-1550 के मध्य अपने शिखर पर रहा। हम्मुराबी बेबीलोन के सभी शासकों में सबसे महान शासक रहे। उन्होंने लार्सा के राजा रिम-सिन को पराजित कर निचले बेबीलोन के सभी नगर-राज्यों पर अपना शासन स्थापित किया। इनकी सैन्य शक्ति भी मारी के पतन में सहायक थी।
राजा हम्मुराबी के शासन काल के दौरान ही बेबीलोन में सृष्टि की कथा (Babylonian Creation Story) गढ़ी गई। कवियों द्वारा मर्दुक जो कि बेबीलोन के संरक्षक देवता थे, की प्रशंसा में कविताएँ रची गईं। इन्हीं के शासनकाल के दौरान सुमेरियन भाषा का चलन प्रायः लुप्तप्राय हुआ एवं सेमेटिक भाषा जनसाधारण की भाषा के रूप में प्रचलित हुई।
मारी मृदा पत्रों की खोज से यह ज्ञात हुआ कि ई.पू. 2000 में सेमेटिक लोग, जो कि खानाबदोश थे, सीरिया में उपजाऊ क्षेत्र में बसे और उनकी सभ्यता विकसित हुई और वे पश्चिमी लोग कहलाए। कालान्तर में ये ही लोग बाइबिल के पुराने नियम में वर्णित अमोरी कहलाए। अमोरी राज्य लगभग सम्पूर्ण मेसोपोटामिया में फैला हुआ था। जिसमें प्रमुख नगर नाहोर, हारान, मारी कतना, उगरीत आदि थे। बेबीलोन स्वयं भी राजा हम्मुराबी के शासनकाल के दौरान अमोरियों के अधीन रहा।

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